कालसर्प दोष शांति का सरल उपाय ,बिना कुछ खर्च के
कालसर्प योग बडा विकट योग है । इसके जन्म कुंडली मे रहते किसी भी कार्य मे सफलता नही मिलती । गृहक्लेश, रोग,संतान हीनता ,कर्ज बढना,चोरी होना ,वंश नष्ट होना , दुर्भाग्य, असफलता, ऐसे अन्य प्रकार की दुर्घटना सामने आती है ।इस योग मे एक्सीडेंट की संभावना अधिक रहती है , भयानक रोग की उत्पत्ति आदि ।
आपको बिना कुछ खर्च किये दोष शांति का उपाय बताते है जिससे शत प्रतिशत लाभ मिलेगा ।
यदि किसी जातक की जन्म कुंडली मे कालसर्प योग की पीडा दृष्टिगोचर होती है और संतान सुख का अभाव हो और वह कालसर्प अनुष्ठान करा पाने मे असमर्थ हो तो उसे किसी वट के वृक्ष की नित्य 108 प्रदक्षिणा करनी चाहिए । उसकी पीडा स्वतः ही शान्त हो जाती है और उसे संतान सुख की प्राप्ति भी होती है तथा समस्त पीड़ा से मुक्ति मिलती है । जैसे जैसे उपाय करते जाते वैसे ही परिणाम सामने आने लगते है ।
यदि किसी जातक की जन्म कुंडली मे कालसर्प योग की पीडा दृष्टिगोचर होती है और संतान सुख का अभाव हो और वह कालसर्प अनुष्ठान करा पाने मे असमर्थ हो तो उसे किसी वट के वृक्ष की नित्य 108 प्रदक्षिणा करनी चाहिए । उसकी पीडा स्वतः ही शान्त हो जाती है और उसे संतान सुख की प्राप्ति भी होती है तथा समस्त पीड़ा से मुक्ति मिलती है । जैसे जैसे उपाय करते जाते वैसे ही परिणाम सामने आने लगते है ।
ॐ नवकुलाय विघ्नेह विषदंताय धीमही ।
तन्न: सर्प : प्रचोदयात ।।
तन्न: सर्प : प्रचोदयात ।।
