सूर्य और अष्टम भाव में उपश्थिति
यदि किसी जातक की जन्म कुंडली में सूर्य अष्टम भाव में हो तो वह मष्तिस्क के अष्टम भाग को प्रभावित करता है ! जिससे जातक के अंदर निष्चयी शक्ति का विकास होता है ! जिससे जातक के अंदर हर तरह की मुसीबत से लड़ने की शक्ति उत्पन्न हो जाती है ! पीड़ित अवस्था जातक विक्षिप्त हो सकता है !
इस अवस्था में सूर्य का उपचार आवश्यक ह ै ! सूर्य राजयोग का कारक भी है जिससे कार्य क्षेत्र में विफलता मिलती है !