Wednesday, November 14, 2018

रोग और ज्योतिष




                                                                रोग और ज्योतिष 




            दाम्पत्य जीवन को सुखी रखने में आरोग्यता का प्रमुख स्थान है ! आरोग्यता तन ,मन दोनों से होनी चाहिए !
                जन्मकुंडली में रोग का ६ स्थान है एवं अष्टम मृत्यु का , प्रथम शरीर तथा १२ भाव शरीर के व्यय का स्थान है ! अत : रोग के विषय में निम्न ग्रहो  विचार करना अति  आवश्यक है !

  1. ग्रह ६ भाव में स्थित हो 
  2. ग्रह ८ भाव में स्थित हो 
  3. ग्रह १२ भाव में स्थित हो                                                                                                                                            
  • लग्न से २ और ७ भाव को मारक स्थान कहते है ! अत : इन भावो में स्थित ग्रहो की दशा अंतर् दशा तथा द्वितीयेश और सप्तमेश की दशा - अंतर दशा रोग देने वाली होती Image result for diseaseहै !

astrotrivedi: सूर्य और अष्टम भाव में उपश्थिति

astrotrivedi: सूर्य और अष्टम भाव में उपश्थिति:                                 सूर्य और अष्टम भाव में उपश्थिति                          यदि किसी जातक की जन्म कुंडली में सूर्य अष्ट...

सूर्य और अष्टम भाव में उपश्थिति




                                सूर्य और अष्टम भाव में उपश्थिति



                         यदि किसी जातक की जन्म कुंडली में सूर्य अष्टम भाव में हो तो वह मष्तिस्क के अष्टम भाग                      को प्रभावित करता है !       जिससे जातक के   अंदर निष्चयी शक्ति का विकास होता है ! जिससे                        जातक के   अंदर हर तरह की   मुसीबत से लड़ने की शक्ति उत्पन्न हो  जाती है  ! पीड़ित अवस्था  जातक विक्षिप्त हो  सकता है !

                      इस अवस्था में सूर्य का उपचार आवश्यक ह ै ! सूर्य राजयोग का कारक भी है जिससे कार्य क्षेत्र में विफलता मिलती है !
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Monday, November 12, 2018

कालसर्प दोष शांति का सरल उपाय ,बिना कुछ खर्च के

कालसर्प दोष शांति का सरल उपाय ,बिना कुछ खर्च के
कालसर्प योग बडा विकट योग है । इसके जन्म कुंडली मे रहते किसी भी कार्य मे सफलता नही मिलती । गृहक्लेश, रोग,संतान हीनता ,कर्ज बढना,चोरी होना ,वंश नष्ट होना , दुर्भाग्य, असफलता, ऐसे अन्य प्रकार की दुर्घटना सामने आती है ।इस योग मे एक्सीडेंट की संभावना अधिक रहती है , भयानक रोग की उत्पत्ति आदि ।
आपको बिना कुछ खर्च किये दोष शांति का उपाय बताते है जिससे शत प्रतिशत लाभ मिलेगा । 
यदि किसी जातक की जन्म कुंडली मे कालसर्प योग की पीडा दृष्टिगोचर होती है और संतान सुख का अभाव हो और वह कालसर्प अनुष्ठान करा पाने मे असमर्थ हो तो उसे किसी वट के वृक्ष की नित्य 108 प्रदक्षिणा करनी चाहिए । उसकी पीडा स्वतः ही शान्त हो जाती है और उसे संतान सुख की प्राप्ति भी होती है तथा समस्त पीड़ा से मुक्ति मिलती है । जैसे जैसे उपाय करते जाते वैसे ही परिणाम सामने आने लगते है ।
ॐ नवकुलाय विघ्नेह विषदंताय धीमही ।
तन्न: सर्प : प्रचोदयात ।।
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Astrology | दुर्घटना से हो परेशान , तो करे ये अचूक उपाय

                                         दुर्घटना से हो परेशान , तो करे ये अचूक उपाय



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यदि  किसी  साथ बार - बार दुर्घटना होती है तो शुक्ल पक्ष (अमावस  के तुरंत बाद का पहला ) प्रथम मंगलवार को 400 ग्राम दूध से चावल धोकर बहती नदी में अथवा झरने में प्रबहित करे ! यह उपाय लगातार  सात मंगलवार करे ! दुर्घटना होना बंद हो जायेगा !  https://www.astrotrivedi.com


Astrology | चमत्कारी काली मिर्च

                                                    चमत्कारी काली मिर्च

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यदि किसी मनुष्य के ऊपर शनि देव की ढैया या साढ़ेसाती का प्रभाव हो तो उसे काले कपडे में थोड़ी सी काली मिर्च और कुछ पैसे दान करने चाहिए ! इस उपाय से शनि देव का प्रकोप शांत हो जाता है ! यह एक सिद्ध उपाय है !
  ढैया से पीड़ित हर मनुष्य को ऐसा करना चाहिए !    https://www.astrotrivedi.com

ध्यान ( #meditation) के लाभ । ध्यान क्यों करना चाहिए ?

ध्यान के कई लाभ हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं: तनाव में कमी :-  ध्यान आपको तनाव को प्रबंधित करने और नकारात्मक भावनाओं को कम करने में मदद कर ...