रोग और ज्योतिष
दाम्पत्य जीवन को सुखी रखने में आरोग्यता का प्रमुख स्थान है ! आरोग्यता तन ,मन दोनों से होनी चाहिए !
जन्मकुंडली में रोग का ६ स्थान है एवं अष्टम मृत्यु का , प्रथम शरीर तथा १२ भाव शरीर के व्यय का स्थान है ! अत : रोग के विषय में निम्न ग्रहो विचार करना अति आवश्यक है !
- ग्रह ६ भाव में स्थित हो
- ग्रह ८ भाव में स्थित हो
- ग्रह १२ भाव में स्थित हो
- लग्न से २ और ७ भाव को मारक स्थान कहते है ! अत : इन भावो में स्थित ग्रहो की दशा अंतर् दशा तथा द्वितीयेश और सप्तमेश की दशा - अंतर दशा रोग देने वाली होती
है !

